21 jun yog diwas

योग दिवस विशेषांक- AK47

योग को योग ही रहने दो l. योगा नाम देकर इसमे विकृति मत पैदा करों. ताज्जुब है की बड़े से बड़े नेता और योग आचार्य भी योग को योगा बनाने पे तुले हुए हैँ. योगा बनाने का बाद योग की ध्यान की अवस्था विलुप्त होती जा रही है.

21 jun yog diwas
21 jun yog diwas

👉 जिस ध्यान साधना का सूत्र महर्षि पतंजलि ने दिया. पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है।
जिसका अनुकरण करके महावीर ने यम और नियम को स्थापित किया और बुद्ध ने ध्यान की विधा प्राप्त की और अष्टांग मार्ग का प्रचार किया और ये दोनों महापुरुष से भगवान बनने की यात्रा प्राप्त हुए और आज भी जनमानस इनको भगवान की तरह पूजता हैँ., 🙏

👉यूं तो योग साधना की विधा सनातन काल से चली आ रही है जिसका अनुकरण करके राम, कृष्ण भगवान🙏 बने और बाद में अनेक ऋषि मुनि ने योग की विधाओं का प्रचार किया और ध्यान साधना करके भगवत प्राप्त हुए. आदिगुरु शंकराचार्य, महावतार बाबा, लहरी महाशय, विशुधाननंद, समर्थ गुरु रामदास, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद और पूजनीय देवराहा बाबा, गायत्री पीठ के संस्थापक पंडितश्री राम शर्मा आचार्य और भी अनगिनत योग ऋषि इस भारत भूमि पर अवतरित होके योग साधना की विधा को आम जान मानस तक प्रसारित किया. जिससे मनुष्य अपने जीवन के परम उद्देश्य अर्थात मोक्ष को प्राप्त हो सके.
👉योग को जनमानस तक पहुंचने का श्रेय परम गुरु गोरखनाथ को जाता हैँ जिन्होंने इतने योग की विधाये बताई की जिससे मनुष्य अपने अनुसार योग को चयन करके उसमे सिद्ध हो सके. इसीलिए प्राचीन समय से हमने एक कहावत सुनी हैँ “गोरखधंधा”.
👉 योग साधना के अनगिनत मार्ग हैँ . जिस मार्ग से आप अपने को भगवान मे लीन कर लेते हो वही उत्तम मार्ग होता हैँ. ध्यान मनुष्य को सेंसेटिव बनता हैँ. जैसे जैसे ध्यान बढ़ता हैँ आप महसूस करते हो की एकांत स्थान पर भी आपके आसपास कोई मौजूद हैँ जो आपसे बाते करना चाहता हैँ, आपको प्रेम से देख रहा हैँ, आपको अपने होने का अहसास दिलाता हैँ. ये कुछ भी हो सकता हैँ. पेड़ पौधे से, प्रकृति से आप अपना जुड़ाव महसूस करने लगाते हैँ. आप अचानक से पौधों से चिढ़ियो से जानवरो से बाते करने लगते हैँ. उनकी बाते समझते हैँ ओर वो भी अपनी बाते आपसे कहते हैँ जैसे हम इंसानों मे होता हैँ. जैसा की हम सुनते आये हैँ की पहले के योगी, बाबा लोग जानवरो की पेड़ो की बात समझते थे और उनसे बाते करते थे. ये sअब साधना से ही संभव होता हैँ.
👉धयान मे ओर उतरने पर सेन्सटिवनेस यानि की सुक्छ्म्ता बढ़ती हैँ ओर नदियों पहाड़ो सब सजीव लगाने लगते हैँ ओर हमारी सनातन धरना की इस ब्रह्मांड मे सब जीवित अवस्था मे ही हैँ कुछ भी निर्जीव नहीं हैँ. उसका ज्ञान होने लगता हैँ. कितने ही योगी ऋषि हुए जिन्होंने पर्वतो से निर्जीव दिखाने वाले बस्तुओ से जीवो से संवाद स्थापित किया. ये सब ध्यान ओर साधना मे गहरे उतरने ओर साधने से ही संभव होता हैँ.
👉योग कीजिये साथ मे ध्यान और साधना को भी कीजिये या किसी योग्य ध्यानस्थ योगी से गुरु से सीखिए. योग से करुणा, इच्छाशक्ति, एकाग्रता का संचार होता हैँ.
👉योग, ध्यान और साधना ये कमशः होते हैँ और इनकी शुरुवात योग से ही होती हैँ. और मनुष्य तभी पूर्णता को प्राप्त होता हैँ जब वो समाधी की अवस्था को प्राप्त होता हैँ. 🙏जय बाबा गुरुगोरखनाथ जय महाकाल 🙏

एक झलक योग इतिहास पर 👇
योगसूत्र, योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह छः दर्शनों में से एक शास्त्र है और योगशास्त्र का एक ग्रंथ है। योगसूत्रों की रचना ३००० साल के पहले पतंजलि ने की। इसके लिए पहले से इस विषय में विद्यमान सामग्री का भी इसमें उपयोग किया।[🙏योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विधान है।🙏 पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात मन को इधर-उधर भटकने न देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

योगसूत्र मध्यकाल में सर्वाधिक अनूदित किया गया प्राचीन भारतीय ग्रन्थ है, जिसका लगभग ४० भारतीय भाषाओं तथा दो विदेशी भाषाओं (प्राचीन जावा भाषा एवं अरबी में अनुवाद हुआ। यह ग्रंथ १२वीं से १९वीं शताब्दी तक मुख्यधारा से लुप्तप्राय हो गया था किन्तु १९वीं-२०वीं-२१वीं शताब्दी में पुनः प्रचलन में आ गया है।
योग दिवस की शुभकामनाय🙏
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One thought on “21 जून योग दिवस विशेषांक- ध्यान की पद्धति विलुप्त होती जा रही है”

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