संस्कृत प्रोफेसर असहाब अली का निधन होना एक अच्छे मुस्लमान का कम होना

 संस्कृत प्रोफेसर असहाब अली का निधन होना एक अच्छे मुस्लमान का कम होना

मेरी तरफ़ से आपको विन्रम श्रद्धांजलि,,,

DDU में संस्कृत पढ़ाने वाले गोरखपुर के प्रोफेसर असहाब का निधन, खुद को बताते थे दाढ़ी के साथ संस्कृत वाला!

गोरखपुर के पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में 32 सालों से अधिक समय तक संस्कृत पढ़ाने वाले और संस्कृत विभाग के एचओडी रह चुके प्रोफेसर असहाब अली का निधन हो गया है.

प्रोफेसर असहाब अली मूल रूप से महराजगंज के जमुनिया गांव के थे. असहाब अली 2011 के जून महीने में रिटायर हुए.

गोरखपुर विश्वविद्यालय में वो 1973 से ही रिसर्च के दौरान पढ़ाने लगे थे. 1977 में उनको नियुक्ति मिल गई. तब से लेकर 2011 तक वह विश्वविद्यालय में छात्रों को संस्कृत की शिक्षा देते रहे. रिटायरमेंट के समय प्रोफेसर असहाब संस्कृत विभाग के एचओडी थे.

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उन्होंने एक वाकया याद करते हुए कहा कि एक बार वो सिबली कॉलेज में सिलेक्शन के लिए गये थे. तब वहां पर किसी ने कहा कि संस्कृत के लिए सिलेक्शन करना है न कि फारसी के लिए.

तब असहाब अली ने हाजिर जवाबी में कहा कि मैं दाढ़ी के साथ संस्कृत वाला ही हूं.

बता दें प्रोफेसर असहाब अली ने इंटरमीडिएट परीक्षा में संस्कृत में टॉप किया था.

इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन संस्कृत में किया और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन में उनका स्पेशलाइजेशन वेदों पर रहा था ।

पीएचडी उन्होने वैदिक और इस्लामिक मिथकों के तुलनात्मक अध्यन पर किया था ।

  • Ak47

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