अर्नब की जमानत याचिका रद्द 14 दिन की हिरासत का आदेश दिया

जैसा की हम सब nr पिछले दिनो देखा की kaise राष्ट्रवादी पत्रकार श्रीमान अर्नव गोस्वामी को मुम्बई पुलिस ने उनके घर से आतंकियों की तरह खींचते हुए बाहर ले गयी. जोकि किसी भी तरह से उचित नहीं था.

ये मुंबई पुलिस ने अपनी बरसो की अच्छी इमेज पे कालिख पोतने का काम किया हैँ. जो मुम्बई जो मुंबई पुलिस अपने अच्छे कर्मों के लिए अपराधियों को सजा देने के लिए गैंगस्टर को खत्म करने के लिए जानी जाती थी आज उसने लोकतंत्र के चौथे खंभे को गिराने का एक दुस्साहस काम किया है जिसकी चारों तरफ आलोचना की जा रही है.

18 नवंबर तक हिरासत मे

अर्नव गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ के एसपी को समन पूरी जानकारी मांगी.

पूरी वीडियो देखिये

अर्नव गोस्वामी को पुलिस द्वारा घसीटा गया और हिरासत मेरे लिया गया

जहां अरनव की गिरफ्तारी लोकतंत्र के चौथे खंभे का गिरना है उस पर हमला है अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला हैं वही सबसे महत्वपूर्ण बात जो तथाकथित पत्रकार जैसे रविश, राजदीप, बरखा दत्त जैसे पत्रकार अभिव्यक्ति की आजादी के लिए सालो से शोर करते आ रहे हैँ आज वो सब किसी सन्नाटे की ठंडी मे सिकुड़ के बर्फ हो गए. शायद इसीलिए उनकी आवाज को लकवा मार गया. एक शंब्द नहीं निकल रहा इनके मुख से.

सारा राष्ट्र और राष्ट्रवादी अर्नव गोस्वामी के साथ hai.

देश ki कई जगहों से अर्नव के समर्थन मेरे लोगो ने आवाज उठायी.

अर्नब की जमानत याचिका रद्द 14 दिन की हिरासत का आदेश दिया

जिस मणिकर्णिका की स्थापना के बाद कंगना ने घोसड़ा की थी की वो पहली फील्म अयोध्या पे बनाएगी,आज वो मणिकर्णिका फील्म हमारी आँखों के सामने टूट रहा है.

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