August 14, 2020

क्योकि सच कड़वा होता है..

राहुल जी को युवा नेता बनाए रखने के लिए सचिन पायलट की भी कुर्बानी दी गई , नमन रहेगा शाही परिवार को 🤣 अब आगे देखते है।

राहुल जी को युवा नेता बनाए रखने के लिए सचिन पायलट की भी कुर्बानी दी गई , नमन रहेगा शाही परिवार को 🤣
अब आगे देखते है।

राहुल गांधी के बेहद करीबी और पार्टी की युवा ब्रिगेड के सबसे चमकदार चेहरों में से एक सचिन पायलट को राजस्थान के उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पद से भी उनकी छुट्टी करते हुए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह उनसे नाता तोड़ने को तैयार है। आखिरी वक्त तक पायलट को मनाने की कोशिश में जुटी पार्टी ने आखिर क्यों और किस तरह यह फैसला लिया? यह जानने के लिए हिन्दुस्तान टाइम्स ने कांग्रेस के कई बड़े नेताओं से बात की और कड़ियों को जोड़कर इस सवाल का जवाब जुटाने की कोशिश की है।

फैसले की प्रक्रिया में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पायलट ने पार्टी नेताओं के सामने तीन मांगें रखी थीं, जिन्हें माना नहीं जा सकता था।

इसमें से पहली मांग यह थी कि चुनाव से एक साल पहले, 2022 में उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाए। पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर नेता ने बताया, ”वह सार्वजनिक रूप से हमसे वादा चाहते थे कि आखिरी साल में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। वह चाहते थे कि इसकी घोषणा कर दी जाए।”

दूसरी मांग यह थी कि पायलट के साथ बगावत करने वाले मंत्रियों और विधायकों को उचित स्थान दिया जाए। इसका मतलब यह नहीं कि सभी को मंत्री बनाया जाए, लेकिन उन्हें कॉर्पोरेशन या अन्य बॉडीज का प्रमुख बनाकर सम्मानित किया जाए।

कांग्रेस के मध्यस्थों के सामने तीसरी मांग रखी गई थी कि कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे के राजस्थान का प्रभार वापस ले लिया जाए। पायलट मानते हैं कि पांडे का झुकाव मुख्ममंत्री अशोक गहलोत की तरफ था और स्थिति तभी सामान्य होगी जब किसी अन्य व्यक्ति को लाया जाए।